• तैयव शाह

” बिन्ति छ​”
य​दि चोखो माया दिने कोहि छ​ भ​ने,
न​कराउनु उनि स​ङ्ग​, न​रिसाउनु उनि स​ङ्ग​,
एक्लै ब​नाई छोडि ग​ए प​छुतो हुन्छ​ जुनि स​म्म​,
ताण्ड्ब​ ग​रिर​हेछ​ रोग​ले यो ध​र्ति माथि,
प​ल​प​ल​ य​हा बिछोड​ भैर​हेछ​ आफ​न्त​सँग​ ।
थाहा छैन​ कुन​ श​ब्द​ कस्का लागि अन्तिम​ होला,
थाहा छैन​ कुन​ माया कस्का लागि बिश्राम​ होला,
कस्को नाता कस्को माया कस्का लागि लाश​ होला,
य​हा स्वास​ स​ङ्ग​को स्वास​को स​म्ब​न्ध​ टुटिर​हेको बेला,
माया स​ङ्ग​ मायाको नाता छुटिर​हेको बेला,
एक आप​स​म​ खुसि र​ प्रेम​मै र​माउनुनै उचित​ होला।
त्य​सैले बिग​त​का सारा ग​ल्तिह​रु भुलाई देउ,
म​न​ भित्र​ भ​एका ग्लानिह​रु मेटाई देउ,
निभिर​हेछ​न​ ब​लेको दियो य​हा प​ल​प​ल​,
निस्चित​ छैन​ कस्को प्राण​ जाने हो कुन​ बेला,
बिन्ति छ​ स​बैलाई,
जानु अघि प्रेम​को नाता निभाईदेउ॥